शायरी की डायरी से

मौत मांगी थी हमने खुदाई नहीं ।

एक मुलाकात मांगी थी हमने जुदाई नहीं।

हम तो रखते थे महफिल की ख्वाहिश।

मांगी हमने कभी तन्हाई नहीं।

कसम खाकर भूल जाना फितरत में है तेरी शायद।

क्यों मोहब्बत मेरी तेरे दिल में समायी नहीं।

हर बात बिन कहे आंखों से कह देते थे तुम।

पर आज दिल की बात बतायी नहीं।

मुझपर हर बार लगाए इल्जाम ही तुमने

जबकि कोई बात तुमसे मैंने छिपायी नहीं।

फौजीया शेख,नागपुर

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